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रूपक साहित्य में एक प्रकार का अर्थालंकार है(इसमें अर्थ करने पर ...

wikipedia - 27 Sep 2020
रूपक साहित्य में एक प्रकार का अर्थालंकार है(इसमें अर्थ करने पर रूपी शब्द का प्रयोग होता है) जिसमें बहुत अधिक साम्य के आधार पर प्रस्तुत में अप्रस्तुत का आरोप करके अर्थात् उपमेय या उपमान के साधर्म्य का आरोप करके और दोंनों भेदों का अभाव दिखाते हुए उपमेय या उपमान के रूप में ही वर्णन किया जाता है। इसके सांग रूपक, अभेद रुपक, तद्रूप रूपक, न्यून रूपक, परम्परित रूपक आदि अनेक भेद हैं।

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